ये कहानी एक लड़के की है जिसने अपने पिता के आचरड़ में कुछ बदलाव किया | लड़के का नाम था मानष वो एक दिन अपने घर के पास की गली में अपने दोस्तों के साथ खेलने गया| पूरी गली बच्चो से भरी पड़ी थी और बच्चो की हसी से गूंज रहा था| सभी अच्छे मजे में खेल रहे थे| सबके चेहरे पर हसी थी मानष भी उन्ही बच्चो के साथ मिल गया और खेलने लगा| खेलते-खेलते किसी बात पर मानष की विनय नाम के एक लड़के से बहस हो गयी और वो बहस धीरे-धीरे लड़ाई में बदल गयी| लड़ाई के बीच में वियन में मानष को माँ की गाली दे दी पूरा माहौल शांन्त हो गया| चारो ओर सन्नाटा छा गया और मानष का चेहरा आग के अंगारे की तरफ लाल हो गया और आँखो से मानो आग निकल रहा हो| मानष अपने गुस्से पर काबू नहीं कर पाया और विनय को बहुत मारा| पास खड़े लोगो ने किसी तरह दोनों को अलग किया और दोनों को घर भेज दिया| इस बात का पता किसी तरह मानष के पिता मयंक को चल गया| वो रात में वो गुस्से में घर पहुंचे और पहुचते ही तेज आवाज में चिल्लाया " मानष " | मानष डरा सेहमा अपने माँ "जानवी" के साथ अपने पिता के सामने आया| मयंक ने मानष का हाथ पकड़ कर अपनी ओर खींच लिया जानवी मानष को पकड़ना चाही पर वो नहीं पकड़ पाई मयंक ने गुस्से में मानष को थप्पड़ मारना शुरू कर दिया और मयंक ने भी गुस्से में वही काम कर दिया जो विनय ने की "माँ की गाली " दे दी| मानष ये शब्द सुनते ही आव न देखा ताव टेबल पर पड़ी चाकू उठाया और अपने गर्दन पर रख लिया और बोला कोई मेरे करीब मत आना नहीं तो मैं अपना गला काट लूंगा| मयंक और जानवी दोनों डर गए और हड़बड़ाती आवाज में मानष से चाकू दूर रखने को बोला "प्लीज बेटा चाकू फेक दे बेटा"|पर मानष पास में पड़ी अपने पिता के बेल्ट को उठा लिया| मानष गुस्से में था और अपने पिता से बोला - आप को मालूम है की मैंने विनय को क्यों मारा क्योकि विनय ने मेरी माँ को गाली दिया था और जो मेरी माँ को गली देगा मैं उसे मरूंगा और बार- बार मरुँगा और आप ने भी मेरी गलती पर मेरे माँ की गाली दी| मैं आप पर हाथ नहीं उठा सकता और मेरी वजह से ही आप ने गाली दी सब मेरी गलती है| इतना बोलते ही मानष ने हाथ में लिए बेल्ट से अपने आप को मरना शुरू कर दिया और बोलता रहा सब मेरी गलती है|यह देख कर जानवी मानष को रोकने के लिए आगे बड़ी पर मानष पीछे हटा और बोला मैं अपना गला काट लूंगा यह सुन कर जानवी रुक गयी पर मानष अपने आप को मरता रहा और रुका नहीं| मयंक, मानष की बातो को सुन कर शांत हो गए और अपने बेटे से माफ़ी मांगने लगे और बोले रुक जा बेटा रुका जा पर मानष नहीं रुका अपने आप को मरता रहा| एक हाथ से चाकू गर्दन पर रखा रहा और दूसरे हाथ से बेल्ट से अपने आप को मरता रहा| अपने माता पिता के बहुत मनाने के बाद भी वो नहीं रुका और अपने आप को मारता रहा और बेहोश हो कर गिर गया| मयंक ने मानष को गोद में उठाया और रोते हुए हॉस्पिटल की ओर भागा वहा मानष को एडमिट किया गया और इलाज के बाद मानष को अगले दिन होश आया| मयंक मानष के पास पहुंचे और बोले "मैं आज कसम खता हुँ की मैं आज से कभी गली नहीं दूंगा " , पर तुम्हे भी अपने गुस्से पर काबू करना होगा| उसके बाद मयंक ने मानष को प्यार से समझाया| सभी हसी खुशी वापस घर आ गए |
इस घटना के बाद मयंक के घर के आस पास के लोगो भी गाली देना छोड़ दिए|
~ गाली देना सही बात नहीं, अनजाने में हम कई बार अपनों को हीं गाली बैठते है और उनसे लड़ाई कर बैठते है|
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~ आलोक पांडेय
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